Tuesday, February 9, 2010

सिस्टम में सब चोर हैं



सिस्टम में सब चोर हैं


लोगों के जाए बिना ही कैसे खुल


जाते हैं खाते
 


छत्तीसगढ़ के कृषि सचिव ने राज्य के कई ऐसे गरीबों को लखपति बना दिया था जिनके पास दो वक्त की रोटी जुटाने का भी साधन नहीं है. ये काम भले का होता, यदि जिनके नाम खाता है उन्हें इस बात की जानकारी होती और वो इस खाते का खुद संचालन कर पाते. काले धन को सफ़ेद बनाने का ये खेल क्या सिर्फ कृषि सचिव के चाह लेने से संभव हो पाता.क्या बैंक के अफसर को इस बात के लिए जिम्मेदार नहीं माना जा सकता की जो व्यक्ति बैंक आया ही नहीं है उसके नाम का पास बुक, उसके नाम से चैक आखिर कैसे जारी हो गया. और उस खाते से लाखों रुपये का लेनदेन इन खातेदार की उपस्थिति के कैसे हो रहा था. जाहिर है सिस्टम में सब चोर हैं क्योंकि बिना बैंक अफसरों के सहयोग के इतना बड़ा खेल कर पाना संभव नहीं हैं. लोग बताते हैं की जिस बैंक के बारे में चर्चा छिड़ी है उसके बारे में ऐसी जानकारी है कि वहां सहर के कई और नामी लोगों की इसी तरह कई खाते चल रहे है. यदि उस बैंक के खतों की जाँच की जाए तो निश्चित ही कई बड़े लोगों के फर्जी खातों का पता चल सकता है. कलयुग में सच और सच के रास्ते पर चलने वाले लोगों को आसानी से सुख नसीब हो पाना संभव नहीं है.क्योंकि आज का पूरा सिस्टम ही बिकाऊ और भ्रष्ट है और चोरों के कारण चंडाल राज कर रहें हैं. अभी की घटना में इतना बवाल होने के बाद भी सरकार ने सिर्फ बयान ही जारी किया है कारवाई करने की हिम्मत हो ही नहीं रही है ऐसे में जांच में फंसे अफसर को भी हिम्मत आ गयी की पत्रकारों को बुलाकर बोल रहा है कि मै बेक़सूर हूँ. ये तो इस बात कि इन्तहां हो गयी कि पहले चोरी ऊपर से सीनाजोरी. इतनी मोटी तनखा होने,सरकार द्वारा तमाम सुख-सुविधा देने के बाद भी इस तरह लूट खसोट मचा रखें है तो फिर आम जनता का भला हो पायेगा ये सोचना भी मुश्किल है. नेता हो या मंत्री हर कोई अपनी जिंदगी भर की कमाई एक साथ कमा लेना चाह रहा है. इस पर रोक लगाने के लिए हर पांच साल में सभी अफसरों के खाते और उनकी संपत्ति की जांच करना अनिवार्य कर देना चाहिए ताकि काली कमाई पर कुछ हद तक रोक लग सके.

1 comment:

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari said...

बहुत अच्छी अभिव्यक्ति, धन्यवाद.