Saturday, December 19, 2015

त नागिन डांस कइसे करबो यार..

शादी ब्याह में बजने वाले डीजे पर मध्यप्रदेश सरकार ने प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। एमपी की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी 

कुछ इसी तरह की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। लेकिन डीजे बजने के दौरान डांस करने वालों की चिंता इसने बढ़ा दी है। क्योंकि 

शादी किसी की भी हो इसमें कुछ लोग ऐसे जरूर होते हैं जो डीजे बजते ही झूमने लगते हैं। उनके झूमने का अंदाज देखकर 

यह बात साफ समझ में आती है कि उन्हें ऐसे जगहांे पर डांस करने में अलग ही मजा आता है। लेकिन डीजे पर पाबंदी की यहां 

हो रही सुगबुगाहट को लेकर आपस में चर्चा शुरू हो गई है। लोगों की यह चर्चा सोशल मीडिया तक पहुंच गई है. दो लोग इस 

पर कुछ इस तरह अपनी बात रख रहे हैं। पहला अरे यार डीजे नई बाजही त बारात म नाचे के मजाच नि अही। दूसरा हव यार। 

बिना बाजा-गाजा के भला शादी होथे का। कोन हर नियम कानून बनाय हे ते। पहला अरे यार हमर पड़ोसी राज में अइसन हो गे 

हे। आेकर देखी-देखा इहां घलो डीजे ल बंद करवाए के बात चलत हे। दूसरा अइसन म त बरतिया मन का माछी मारत जही। 

अइसन होही त कईझन मन त बेरोजगार घलो हो जाही भइया। पहला अरे बेरोजगार होवइया मन ल त दूसर काम मिल जाही 

फेर जेन मन ला सिर्फ बिहाव के समय डांस करेबर आथें उंकर काय होही। आेमन तो पड़फड़ा के मर जहीं। दूसरा बोलता है 

हव यार सही कहात हस। देखथस नहीं बिहाव के समय जइसन डांस देखेबर हमन ल मिलथे दूसर जगह नई मिले। झटका डांस,  
कुबड़ू डांस, अकड़ू डांस अउ सबले ज्यादा फेमस तो नागिन डांस हे। जब डीजे नइ बाजही त अइसन डांस मन तो विलुत्प हो 

जाही। पहला हंसते हुए सही कहात हस यार। ए डांस मन ल बचाय के खातिर डीजे में प्रतिबंध के फैसला के विरोध म कछु 

करेबर पड़ही। तभी दूसरा एकर बर कछु न कछु करेबर पड़ही अउ नहीं त नेतामन ल धर के परदरसन घलो करबो ताकि एला 

बंद करे। पहला सही कहात हस अइसने कुछ करेबर पड़ही काबर कि जब नेता मन कुछु चीज के विरोध करते त थोड़ा बहुत 

फायदा तो आेकर मिलथे। तभी दोनोंं एक-दूसरे का मुंह ताकते हुए अरे दूसर मनके जे होही ते होही हमर काय होही काबर हमू 

मन घलो तो बिहाव में नागिन डांस करके पार्टी मना लेथन। डीजे बंद हो जाही त हमन नागिन डांस कइसे करबो यार...

Thursday, December 10, 2015


मोर कना पास हे.... तें जुगाड़ कर ले..


हाकी लीग के मैच रायपुर में शुरू हो चुके हैं। प्रतियोगिता में आठ देशों की टीम में हिस्सा ले रही है। चूंकि मैच में प्रवेश के लिए टिकट आैर पास दोनों में किसी एक का होना जरूरी है। ऐसे में शाम को खाली घूमने वाले लोगों के लिए आने वाले 22 दिनों तक मनोरंजन का पता हाकी स्टेडियम बन गया है। लेकिन बिना पास के वहां जाना किसी तकलीफ से कम नहीं है। क्योंकि बाहर से स्टेडियम का नजारा देखकर हाकी न जानने वाला व्यक्ति भी भीतर घुसने की इच्छा जाहिर करेगा। हाकी मैच के पास को लेकर दो दोस्त आपस में कुछ बातें कर रहे हैं। उनकी यह बात सोशल मीडया तक पहुंच गई है। पहला बोलता है साइंस कालेज मैदान में हाकी मैच होवत हे जानत हस कि नहीं। 
दूसरा बोलता है हव यार सुने तो हवं महूं हर लेकिन गे नई हों। पहला बोलता है जाना हे का बता। दूसरा बोलता है चल तो देबो फेर हमर करा न तो टिकट हे आैर न पास हे भइ, कईसे बनही। तभी पहला बोलता है मे हों न तें चिंता झन कर। मोर करा जुगाड़ हे पास के। दूसरा तपाक से बोलता हे तोर करा कहां ले आही। पहला उसकी बात काटते हुए अरे ते मोला नइ जानस। मोर करा सबो जुगाड़ हे। तें आेला जानथस नहीं हमर मोहल्ला में रथे साहब तेला। दूसरा बोलता है अच्छा आे साहब ल काहत हस का। पहला बोलता है. हव उही ला। दूसरा बोलता है त आेकर करा कहां ले आ जाही पास ह..। पहला बोलता है अरे ते नई जानस आेकर भले हाकी से कोई लेना-देना नई हे लेकिन अइसने मन करा तो पास मन आथे। तें एकरा रूक मेंहर जाके आवत हों आेकर घर ले। थोड़ी देर बाद उसे आता हुआ देख दूसरा बोलता है... कइसे मिलिस यार पास... तभी पहला थोड़ा झुंझलाते हुए.. हव यार मिलिस लेकिन एकेठन पास दिस यार आे हर। तभी दूसरा त मेहर काय करहूं। तभी पहला बोलता है मोर करा तो पास हे.. तोर करा नइहे त तहूं जुगाड़ कर लेना तहांन जाबों मेच देखेबर...

त हमन किसानी छोड़ देन कि दारू पीना....

राज्य में फसल खराब होने आैर कर्ज से परेशान किसानों की खुदकुशी के कई मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में खेती किसानी से जुड़े लोगों की परेशानी बढ़ गई है। क्योंकि हर साल किसी न किसी समस्या काे लेकर किसान उलझे हुए नजर आते हैं। किसानों की इस दुर्दशा पर गांव के चौपाल पर दो किसान आपस में खेती की दशा को लेकर बातें कर रहे है। किसानों की खुदकुशी के संदर्भ में किसानों के बीच हुई बातचीत अब सोशल मीडिया में भी पहुंच गया है। क्या उनकी पीड़ा है आैर वे एक दूसरे से क्या कह रहे हैं उसका एक अंश हम अपने पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं। पहला किसान बोलता है कइसे यार ए दारी तोर फसल के का हाल हे। दूसरा बोलता हे काय बताआें भइया ले दे के खाय के पुरता होयहे। फेर वहू हर कोन जनी कतका दिन चलही। तभी पहला बोलता है। हव यार मोरो उइ हाल हे। पता नहीं करजा ल कइसे चुकाबो। काबर मे सोचे रेहेंव कि थोड़ बहुत धान-पान हो जाय रतिस ते करजा से चुका दे रतेंव। तभी दूसरा किसान बोलता है हव महूं आेसने सोचत रेहेंव। पता नहीं काय होही। तभी पहला बोलता है मे हर समाचार मे सुनत रेहेंव कि फसल खराब होयके चिंता आैर करजा नई पटाय सके के कारन कई झन किसान मन आत्महत्या कर लीन हे। तभी दूसरा बोलता हे तभो ले तो सरकार के कान मे जुंआ तक नहीं रेंगत हे। पहला बोलता है सही कहात हस। किसान मन चिंता में मरगे अउ सरकार हर उंकर मौत ल शराब पीये कारन मौत होना बतावत हे। दूसरा बोलता है तहीं बता भइया जेन किसान हर करजा में बूडे़ रही का आेहर शराब पीये बर जाही। अरे जेकर करा खाय बर पइसा नई हे आेला दारू पिए बर पइसा कोन दिही। तभी पहला बोलता है। सही काहत हस यार। कम से कम सरकार ल तो किसान मन के चिंता करना चाही। काबर उंकर अउ कोन पुछइया हे। तभी दूसरा बोलता है अब किसान मरत हे त सरकार ल आेकर जखम मे मरहम लगाना चाही फेर सरकार दहान ले अइसन गोठ बात आए ले जे किसान मरे हे आेकर परिवार वाला मन उपर काय बितत होही एेला घलो समझना चाही। तभी पहला बोलता है महूं मानथो भइया किसान मन दारू पीथे फेर अतिक नइ पिये कि दारू पीके मर जाए। अब तो अइसे लागथे भइया या तो हमन ला किसानी करना छोड़ देना चाही या फेर दारू पिए बर छोड़ देना चाही काबर जब तक दूनो काम करबो तब तक हमर मौत के अइसने मजाक बनत रही।

chattisgarhi


Wednesday, December 9, 2015

वेलकम बैक

मैं वापस आ गया हूं।