Sunday, August 23, 2009

शरारत या किसी बड़ी घटना की तैयारी ?

शरारत या

किसी बड़ी

घटना की

तैयारी ?

Friday, August 14, 2009

आजादी के 62 साल बाद देश मे हर चीज नकली


आजादी के 62 साल बाद
देश मे हर चीज नकली

ये कैसा विकास है? ये कैसी तरक्की है? किस रास्ते पर जा रहा है हमारा प्यारा भारत देश? कौन है इसके लिए जिम्मेदार? कौन रोकेगा इसे? ये और इस तरह के तमाम सवाल देश के उन सभी लोगों से है जो किसी न किसी माध्यम से इस देश के साथ जुड़े हैं ,अर्थात् ये सवाल देश के सवा अरब लोगों से जिनमें देश को चलाने वाले नेता, देश का भविष्य संवारने वाले शिक्षक, देश के स्वास्थ्य की चिंता करने वाले डॉक्टर, देश को नया स्वरूप देने वाले इंजीनियर,देश का पेट भरने वाले किसान और देश के भविष्य की योजना बनाने वाले नौकरशाह सभी शामिल हैं। आजादी के इतने सालों में लिखने के लिए तो बहुत से विषय हैं लेकिन हम यहां पर देश में पांव पसार रहे नकली चीजों के कारोबार पर लोगों का ध्यान आकर्षित करना चाह रहे हैं।अनुभव करें तो आजाद भारत की उम्र जैसे-जैसे बढ़ती जा रही है वैसे-वैसे देश अंदर से खोखला होता जा रहा है। कभी शुद्धता और सौम्यता की मिसाल रहे इस देश की हर एक चीज आज नकली और मिलावटी हो गई है। देश के बाजार में नकली और मिलावटी चीजों की इतनी भरमार हो गई है कि आम आदमी का जीना दूभर हो गया है। नकली चीजें बनाने और मिलावट का कारोबार करने वाले चंद लोगोंं ने करोड़ों लोंगों की जिंदगी खतरे में डाल दी है। अपने आस पास नजर डालें तो खाने-पीने की चीजों से लेकर दैनिक उपयोग की प्रत्येक चीजें नकली हो गई है यहां तक की इन चीजों को खरीदने के लिए उपयोग किया जाने वाला नोट तक नकली बन चुका है। पाकिस्तान और पड़ोसी मुल्क के कुछ कारोबारियों ने भारत के भीतर इतनी अधिक मात्रा में जाली नोटों का जाल फैला दिया है कि वो देश की आर्थिक स्थिति को खोखला करने में महत्वपूर्ण हथियार साबित हो रहा है। नकली सामान,नकली खाद्य पदार्थ और नकली नोट देश के कोने-कोने में पहुंच चुके हैं। नकली समान से लोगों को आर्थिक क्षति,नकली खाद्य पदार्थ से लोगों को शारीरिक क्षति और नकली नोटों से देश को आर्थिक क्षति पहुंच रही है। क्या हमारे पुर्वजों ने देश की आजादी की मांग इन्हीं सब चीजों के लिए की थी ताकि विकास और तरक्की के नाम पर हमें नकली चीेजों का सामना करना पड़े। यदि नकली नोटों, दवाइयों, खाद्य पदार्थों एवं जरूरत की अन्य सामानों का कारोबार देश के भीतर इसी तेजी से फैलता रहा तो देश अंदर से इतना खोखला हो जाएगा कि एक दिन पूरा भारत नकली सामानों से पट जाएगा और नकली नोटों के कारण देश आर्थिक रुप से कमजोर हो जाएगा। आज हम अपने देश के भीतर अपने ही कुछ लोगों की कार गुजारियों के गुलाम बनकर रह गए हैं, हमारी जिंदगी चंद-लालची लोगों के हाथों में है जो मिलावट कर रातों-रात मालामाल हो रहे हैं। यदि हमारा देश आजाद है? देश में लोकतंत्र है? देश में कानून व्यवस्था है? तो देश की छाती पर बैठकर मूंग दलने वाले अर्थात देश के भीतर बैठकर देश भर में तमाम नकली चीजें फैलाने वाले लोगों पर सरकार इतनी नरम क्यों है? हाथ में आने के बाद भी हमारी पुलिस ऐसे लोगों के आकाओं तक क्यों नहीं पहुंच पाती? सरकार को चाहिए कि नकली चीजों का कारोबार करने वाले ऐसे लोगों को देशद्रोही करार देकर इनके खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान रखना चाहिए जिससे इस तरह देश के भीतर जहर घोलने वाले दूसरे लोगों के लिए यह एक सबक हो।
क्या-क्या नकली-
नोट- 100, 500, 1000 के नकली नोटों का जाल
खाद्य पदार्थ- तेल, घी, दूध, मक्खन, खोवा, आइसक्रीम, बिस्किट, चॉकलेट।
कई प्रकार की दवाईयां
आटोमोबाइल में टू-व्हीलर,फोर व्हीलर के तमाम नकली पार्ट्स
इलेक्ट्रीकल्स, इलेक्ट्रानिक्स की तमाम चीजों के नकली माल बाजार में उपलब्ध
ब्रांडेड कंपनियों के नकली कपड़े
विभिन्न यूनिवर्सिटी/ कालेजों के नकली मार्कशीट
टू-व्हीलर/ फोर व्हीलर के ड्राइविंग लायसेंस एवं कागजात
चेहरे पर लगाने वाले क्रीम, पाउडर, हेयर आयल इत्यादि।
क्या हानियां-
नकली चीजें खाने से जानलेवा बीमारियों का खतरा
इनसे आज मनुष्य की औसत उम्र में कमी
विकास में बाधक, विनाश में सहायक।
ऐसे हो बचाव-
सरकार को चाहिए कि वर्तमान में उपलब्ध तमाम नकली पदार्थों को मापने और जांचने परखने का मानक तैयार कर इसे सीधे आम जनता तक पहुंजाया जाना चाहिए जिससे जनता पहचान सके कि कौन सी चीज नकली है और कौन सी असली। अभी तक सरकार नकली नोटों की पहचान के लिए ही जनजागरण अभियान चला रही है। सरकार को ऐसा ही जनजागरण सभी चीजों के लिए चलाया जाना चाहिए।

Thursday, August 13, 2009

पैसों के पैसा बनाने का खेल




रायपुर में खुलेआम हो रही है


सिक्कों की कालाबाजारी


सिक्कों की कालाबाजारी राजधानी सहित जिले के कुछ हिस्सों में जोरों पर है। शहर के नामी इलाकों में कुछ ऐसे लोग हैं जो कमीशन पर सिक्कों का व्यवसाय कर रहे हैं। पैसे से पैसा बनाने के इस खेल के बीच ऐसे लोग तो लाल हो रहे हैं लेकिन इसका दुष्परिणाम आम लोगों और छोटे व्यापारियों की भुगतना पड़ रहा है। छोटे व्यापारी भी बैंकों से सिक्के नहीं मिलने के कारण ऐसे लोगों से कमीशन में सिक्के लेने को मजबूर हैं। इसी मजबूरी के कारण वे अपनी थोड़ी-बहुत कमाई चिल्हर की खरीदी में लुटा देते हैं। बाजार में हालात ये हंै कि अब एक दो रुपए के सिक्के तो दूर पांच के सिक्कों की भी शार्टेज हो गई है। जानकारों की मानें तो आरबीआई द्वारा जारी किए गए सिक्के की क्वालिटी काफी बेहतर होती है जिसका उपयोग कुछ लोगों द्वारा गलाकर बेचने में किया जाता है। बताते हैं कि इससे काफी बढिय़ा क्वालिटी की आर्टिफिशियल ज्वेलरी बनाई जाती है। जिसकी अच्छी कीमत उन्हें मिल जाती है एक विशेष वर्ग सिर्फ इसी काम में लगा हुआ है। इसके अलावा सिक्के खपाने वाला एक गिरोह जरुरत मंदों को 10 से 15 प्रतिशत कमीशन पर सिक्के उपलब्ध करवाता है। सूत्र बताते हैं कि ऐसे लोगों के पास बैकों से मिले सौ सिक्कों की पाउच आसानी से मिल जाती है,इसके लिए सिर्फ उन्हें उसके एवज में ज्यादा रुपए देने होते हैं। गोलबाजार और मौदहापारा थाना क्षेत्र में यह व्यापार खुलेआम संचालित है। कुछ व्यापारियों ने बताया कि एक रुपए के सिक्के के लिए उन्हें ज्यादा पैसे देने होते हैं जबकि पांच रुपए के सिक्के एक रुपए के सिक्के की तुलना में कम कमीशन पर उपलब्ध हो जाते हैं। बैंकों की मानें तो उनके पास आने वाले सिक्के चेम्बर आफ कामर्स के माध्यम से व्यापारियों तक पहुंचते हैं और किस व्यापारी को कितने सिक्के चेम्बर द्वारा दिए गए हैं इसकी लिस्टिंग बैंक के पास जमा की जाती है। लेकिन छोटे व्यापारियों को जिन्हें चेम्बर से सिक्के नहीं मिल पाते उन्हें बैंक से सिक्के देने का प्रावधान है पर छोटे व्यापारियों की मानें तो बैंकों द्वारा उन्हें सिक्के नहीं मिल पाते और ना ही उन्हें सिक्के वाली मशीन से सिक्के उपलब्ध हो पाते हैं। जिससे मजबूरन ऐसे लोगों से ज्यादा दाम में उन्हें व्यावसायिक उपयोग के लिए सिक्के खरीदने पड़ते हैं।


एक नजर कमीशन पर
पुराने सिक्के- 5 से 8 प्रतिशत
नए सिक्के - 10 से 12 प्रतिशत
एक रुपए - सबसे महंगा
दो रुपए -सामान्य
पांच रुपए - कम प्रतिशत पर उपलब्ध


चेम्बर में शिकायत करें- श्रीचंद

चेम्बर आफ कामर्स के अध्यक्ष श्रीचंद सुंदरानी ने कहा कि व्यापारियों को नियमत: सिक्के प्रदान किए जाते हैं लेकिन इस तरह का काम हो रहा है तो गलत है। शहर के किसी भी व्यापारी द्वारा इसकी शिकायत चेम्बर के पास की जाएगी तो निश्चित तौर पर ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।


आवश्यक्ता से अधिक सिक्के नहीं- राव


एसबीआई के उपप्रबंधक रोकड़ चिन्नाराव के मुताबिक सिक्के का आबंटन चेम्बर के माध्यम से व्यापारियों को किया जाता है और आरबीआई के दिशा निर्देश के मुताबिक किसी भी एक व्यापारी को आवश्यक्ता से अधिक सिक्के नहीं दिए जाते क्योकि इससे सिक्के की कालाबाजारी हो सकती है। छोटे व्यापारियों को भी बैकों के माध्यम से सिक्के दिए जाते हैं।


शिकायत पर होगी कार्रवाई- अमित कुमार

एसपी रायपुर अमित कुमार का कहना है कि यदि इस तरह के किसी मामले की शिकायत पुलिस के पास आती है तो उस पर जरुर कार्रवाई की जाएगी।