Tuesday, November 30, 2010

घटता मानवीय मूल्य

घटता मानवीय मूल्य


मनुष्य ने विकास के रास्ते पर जितनी तेजी से कदम बढाया उतनी ही तेजी से एक चीज ने अपना मोल खोया है वह है मानवीय मूल्य. आज सिर्फ आदमी के जेब और कुर्सी की क़द्र ही होती है. इनके आगे सब बेकार. समय बदलने के साथ-साथ लोगो की सोच काफी तेजी से बदली है.आज आदमी के पास सब कुछ है लेकिन वह अपनी कीमत खोता जा रहा है.आज किसी भी इंसान की क़द्र करने के पहले उसके कद को देखा जाता है. भले वह व्यक्ति कितना भी गुणवान क्यों न हो यदि उसकी पहुच और पहचान ऊँची नहीं है तो कई लोग चाहकर भी उसकी क़द्र नहीं करते. समाज में तेजी से आ रहे इस बदलाव के कारण संस्कृति पर चोट पहुच रही है. व्यसायिकता और पैसों की अंधी दौड़ में लोग अपनी मर्यादा को भूलते जा रहे है. आज समाज में फ़ैल रहे इस महामारी को रोकने की जरुरत है.लेकिन इसकी सुरुआत करेगा कौन.सब चाहते है कि पडोसी के घर में पहले बगावत हो. अपना घर सुरक्षित हो.आज पुरे देश में हर कोई प्रगति कर रहा है लेकिन आर्थिक प्रगति ने आज जितनी उचाई पर जा पहुची है मानवीय मूल्य उतनी ही तेजी से नीचे गयी है. आगे न जाने क्या होगा?

Monday, November 22, 2010

Ratanjot, kho gaya ratan

sarkar dildaar :Dimak ke liye laakho rupay ke Bhojan

Ratanjot, kho gaya ratan

Maale muft Dile Beraham

Ratanjot, kho gaya ratan

ab disel kaise milega badi se. jab ratanjoot sad gaya badi me