Wednesday, September 7, 2016
Sunday, May 22, 2016
आईपीएल के ए पास हर हमर से दूर काबर हे यार.....
राजधानी
रायपुर में आईपीएल का रोमांच
चरम पर है। आईपीएल के दो मैचों
की मेजबानी रायपुर को मिली
है। पहला मैच 20
मई
को खेला गया।
मैच के पहले सारी
सिर्फ कुछ टिकिटें ही बचे होने
का हल्ला मचा रहा लेकिन जब मैच
हुआ तो स्टेडियम का लगभग 30
फीसदी
हिस्सा खाली दिख रहा था।
ऐसे
में फ्री पास मिलने आैर टिकिटों
के वितरण को लेकर भी चर्चा
चलती रहती है। दो ग्रामीण भी
इसे लेकर चर्चा कर रहे हैं।
उनके बीच हो रही बातचीत सोशल
मीडिया तक पहुंच गई है। पहला
बोलता है-
अरे
यार ते मेच देखेबर गे रेहे का।
दूसरा तपाक से -
मैच
कोन से मैच ल यार।
पहला -
अरे
नवां रइपुर मे जेन किरकेट के
मेच चलत हे तेकर बारे मे कहात
हो। दूसरा माथे पर चिंता की
लकीरें लाते हुए-
अरे
का बतावं यार,
मेह
सस्ता वाला टिकिट ल लेहूं
कहिके सोचत रेहेव फेर टिकिट
बेचइया मन मोला किहिन के सस्ता
वाला सबो बेचा गेहे आेकर ले
थोकिन महंंगा वाला हे।
पहला
पूछता है त आेला काबर नि ले
यार। दूसरा बोलता हे -
अरे
यार लइका हर शउक धरे रिहिस
तेकर सेती मेहर टिकिट लेबर
जाए रेहेव फेर अतका घलो शउक
नईहे के मांहगा टिकट ले डारों।
अउ ता अउ पइसा घलो तो नइ रिहिस
न यार टिकट लेबर। पहला बोलता
है-
त
तेहर मेच नि दखे।
दूसरा-
कहां
देखेंव यार। लइका अलग रिसागे
आेकर कारन। तभी पहला पूछता
है ते हर त अपन नेता करा नि जाए
रते पास मांगे बर। दूसरा-
अब
ये पास काय हरे।
पहला समझाते
हुए अरे पास मने बड़े-बड़े
मन ला अइसन कोनो कारयकरम के
पास देथें जेकर से आेमन ल बिना
पइसा दे उहां जायबर मिल जाथे।
दूसरा-
अच्छा,
मने
पास मिलही त महूं हर फोकट में
भीतरी खुसर जाय रतेंव। पहला
बोलता है हव यार,
आजकाल
त सबो झन पास के जुगाड़ म घूमत
रथे।
फेर हमर-तुंहर
असन मन ला पास कहां ले मिलही।
दूसरा बोलता है अरे यार त एक
बात समझ नइ आए जेंकर तिर पइसा
कौड़ी भरे परे हे आेमन ल अउ फोकट
में पास देके काय जरूरत हे
यार।
तभी पहला बीच में टोकते
हुए-
हव
यार पास त हमन ल देना चाही जेन
मन टिकट नइ खरीद सकें। जेमन
पइसा लेके टिकट खरीद सकथे आेमन
ल फोकट में टिकट देके हमर मन
के मजाक काबर उड़ावत होही यार
एेमन।
दूसरा तपाक से बोलता
है-
सही
कहात हस यार। बल्कि अइसे करना
चाही कि जेकर तिर पइसा नई हे
आेमन ला पास देना चाही अउ जेकर
तिर पइसा हे आेमन से पइसा लेके
टिकट देना चाही।
एकर अलावा
हमर असन मन ल त कारयकरम के समय
बिना पइसा के खाये पिये बर घलो
देना चाही। तभी पहले के माथे
पर चिंता की लकीरें उभर आती
हैं वह कुछ सोचते हुए बोलता
है -
ठीक
कहात हस यार,
इही
त बिडंबना हरे जेकर तिर पइसा
हे आेला खरचा करेके जरूरत नई
परे अउ जेकर तिर पइसा नइ हे
आेला हर चीज पर पइसा खरचा करेबर
परथे।
अइसने में कहां ले समानता
आही यार। मोला एक बात समझ म नइ
आए कि ए पास हर हमर से दूर काबर
हे यार....
Thursday, March 17, 2016
त अब हमन कहां दारू पीबो यार
राज्य
सरकार ने हाल ही में बार का
लायसेंस थ्री स्टार होटलों
को ही देने का फैसला लिया है।
सरकार ने यह फैसला क्या लिया
मध्यम वर्ग के पियक्कड़ों की
टेंशन बढ़ गई है। क्योंकि कई
पियक्कड़ ऐसे हैं जो थोड़ा स्टेटस
मेंटेन करने के लिए भट्ठी
में नहीं बल्कि बार में जाकर
दारू पीते हैं।
लेकिन सरकार
के इस फैसले ने उनकी भी नींद
उड़ा दी है। बार में शराब पीकर
निकले दो दोस्तों के बीच इसी
को लेकर चर्चा हो रही है। पहला
बोलता है काय बताआें भाई अब
तक हमर रहिसी ल सब जान जाही।
दूसरा बोलता है काय होगे यार...
तभी
पहला बोलता है अरे तोला नइ पता
हे का।
दूसरा बोलता है काय
हर..
मोला
नइ पता हे। तभी पहला लंबी सांस
भरते हुए अरे बाबू अभी जे फइसला
सरकार ह लेहे न सिरतोन में
आेइसने हो जाही त हमन बार में
बइठ के दारू तक नइ पी सकबो।
दूसरा बोलता है काय होगे यार
बने बता ना। पहला थोड़ा गुस्साते
हुए त सुन अभी हमन कहां ले
निकलथन बता।
दूसरा बोलता है
बार ले। पहला -
लेकिन
कुछ दिन बाद ये बार के दरवाजा
दूसर कोती खुलही जाने। दूसरा-
अरे
ते हां ठीक से बता न दारु पिए
कस काबर बतावत हस। पहला हव यार
महूं ह शराबी टइप के गोठियावत
हों। त सून सरकार हर कहात हे
कि अब बार थ्री स्टार होटल
वाला मन ही चला सकथें।
दूसरा-त
काय हाेइस हमूं थ्री स्टार
लगा के आ जाबो। पहला-
अब
तेहां पिये टइप के काबर बात
करत हस। दूसरा-
अरे
हव यार तोर असन महूं हर पिये
टइप के गोठियावत हों। पहला
फिर बोलता अरे यार थ्री स्टार
में बार खुलही त उहां के रेट
ह जादा रही। त हमन कहां से उंहा
जाके पी सकबो यार।
अभी हमन जे
दारू ला दू सो में पी लेथन आेकर
बर उंहा कम से कम आठ सो रुपिया
देबर पड़ही। त काय महीना में
एकेबार पीबो का बता न। तभी
दूसरा बोलता है अरे यार पूरा
गड़बड़ हो जाही। हमन जतिक सेखी
मारते रेहेन सबो घुसड़ जही।
काबर कि अब हमूमन ल भट्टी ले
दारू लेके पीयेबर पड़ही। अउ
अइसन करबो तहांन हम मोहल्ला
के मन हमन ल बिजराहीं। तभी
पहला बोलता है नहीं अइसन नई
होयला देन। दूसरा तपाक से
बोलता है त काय करबे तेहां।
पहला बोलता मेहर काय कर सकहूं
यार। अब हमन दूनो झन ल दूसर
मोहल्ला के भट्ठी में जाके
पियेबर पड़ही जिहां हमर मोहल्ला
के कोई नि दिखही तभे हमर इज्जत
बाचे रही। दूसरा बोलता है
इज्जत बाचे घलो रही आैर रहिसी
अउ बढ़ जही कि एमन त थ्री स्टार
के बार से पीके आवत हें कहीके
जाने।
Saturday, February 6, 2016
यार बिना चैन कहां रे, झन गाबे अब्बड़ मारथे पुलिस वाला मन
राजधानी
में इन दिनों चेन खींचकर भागने
वाले गिरोह का खूब आतंक है।
पिछले एक सप्ताह के दौरान चेन
स्नेचरों ने इतनी घटनाआें को
अंजाम दिया है कि महिलाएं तो
महिलाएं पुरूष भी चेन पहनकर
निकलने से परहेज करने लगे हैं।
दिन दहाड़े हो रही वारदातों
के बीच चैन शब्द वाले गानों
ने पुलिस वालों को परेशान कर
रखा है। क्योंकि इस तरह के
गाने बजाने के कारण पुलिस
वालों को चेन स्नेचरों की याद
आ जाती है। परेशान इसलिए भी
होते हैं क्योंकि जिले के
पुलिस कप्तान इन चेन स्नेचरों
को पकड़ नहीं पाने के कारण
थानेदारों पर काफी गरम हैं।
इसी मसले पर दाे दोस्त आपस में
बातें कर रहे हैं। उनके बीच
हो रही बातचीत सोशल मीडिया
में पहुंच गई है। पहला बोलता
है का बताआें यार मोला पुराना
गाना सुने के भारी शउंक हे।
मोर घर में तो गाना बाजत रथे
अइसने मोर मोबाइल में घलो
पुराना गाना मन ल लोड करवा के
राखे हों। दूसरा पूछता है त
काय होगे यार पुराना गाना
सुनना तो अच्छा बात हरे। महूं
ला पुराना गाना मन अच्छा लागथे।
तभी पहला बोलता है ते तो जानथस
कई ठन गाना मन अइसे शब्द घलो
रथे जेकर से कई झन मन ला बहुत
परेसानी होथे। दूसरा तपाक से
पूछता है मतलब?
पहला
बोलता है मतलब जइसे ते पेपर
मे पढ़े होबे आजकल रइपुर में
चेन चोरहा मन घूमत हावे। तभी
दूसरा बोलता है हव यार मोटरसाइकिल
में आथें अउ झपट्टा मारके
भाग जथें कहिके महूं सुने हों।
त एकर से तोर गाना के काय संबंध
हे ऐला तो बता। पहला बोलता है
अरे एकरे सेती तो कहात हों कि
पुराना गाना नइ सुन सकन काबर
मोर करा जे गाना हे आेमे कई ठन
गाना अइसे हे जेमे चैन आथे।
दूसरा बोलता है चैन आथे मतलब।
पहला बताते हुए जइसे चैन चुराया
मेरा किसन आे...,
यार
बिना चैन कहां रे...,
मुझे
नींद न आए,
मुझे
चैन न आए..
जाने।
दूसरा कुछ सोचते हुए बोलता
है मे समझेंव नहीं?
तभी
पहला बोलता है कि अरे एमे चैन
शब्द जब आथे त पुलिस वाला मन
आेला सुनथें त आेमन ला आेहर
चेन असन सुनाथे। अउ चेन असन
सुनाथे त आेकर बड़े साहब के
डांट घलो सुनई देथे.
जेकर
कारन आेमन भड़क जथें,
मोला
आेदिन एक झन बिक्कट मारिस यार
अउ किहिस ए दहान दिखभे झन नइ
ते ठीक नि होही।
अब तहीं बता
मे काय करों। दूसरा बोलता है
कुछ दिन ते हर गाना सुनेबर बंद
कर दे अउ सुनना हे त अइसन गाना
सुन जेमे चैन शब्द झन आए।
Saturday, December 19, 2015
त नागिन डांस कइसे करबो यार..
शादी
ब्याह में बजने वाले डीजे पर
मध्यप्रदेश सरकार ने प्रतिबंध
लगाने का फैसला किया है। एमपी
की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी
कुछ इसी तरह की सुगबुगाहट शुरू
हो गई है। लेकिन डीजे बजने के
दौरान डांस करने वालों की
चिंता इसने बढ़ा दी है। क्योंकि
शादी किसी की भी हो इसमें कुछ
लोग ऐसे जरूर होते हैं जो डीजे
बजते ही झूमने लगते हैं। उनके
झूमने का अंदाज देखकर
यह बात
साफ समझ में आती है कि उन्हें
ऐसे जगहांे पर डांस करने में
अलग ही मजा आता है। लेकिन डीजे
पर पाबंदी की यहां
हो रही
सुगबुगाहट को लेकर आपस में
चर्चा शुरू हो गई है। लोगों
की यह चर्चा सोशल मीडिया तक
पहुंच गई है.
दो
लोग इस
पर कुछ इस तरह अपनी बात
रख रहे हैं। पहला अरे यार डीजे
नई बाजही त बारात म नाचे के
मजाच नि अही। दूसरा हव यार।
बिना बाजा-गाजा
के भला शादी होथे का। कोन हर
नियम कानून बनाय हे ते। पहला
अरे यार हमर पड़ोसी राज में
अइसन हो गे
हे। आेकर देखी-देखा
इहां घलो डीजे ल बंद करवाए के
बात चलत हे। दूसरा अइसन म त
बरतिया मन का माछी मारत जही।
अइसन होही त कईझन मन त बेरोजगार
घलो हो जाही भइया। पहला अरे
बेरोजगार होवइया मन ल त दूसर
काम मिल जाही
फेर जेन मन ला
सिर्फ बिहाव के समय डांस करेबर
आथें उंकर काय होही। आेमन तो
पड़फड़ा के मर जहीं। दूसरा बोलता
है
हव यार सही कहात हस। देखथस
नहीं बिहाव के समय जइसन डांस
देखेबर हमन ल मिलथे दूसर जगह
नई मिले। झटका डांस,
कुबड़ू
डांस,
अकड़ू
डांस अउ सबले ज्यादा फेमस तो
नागिन डांस हे। जब डीजे नइ
बाजही त अइसन डांस मन तो विलुत्प
हो
जाही। पहला हंसते हुए सही
कहात हस यार। ए डांस मन ल बचाय
के खातिर डीजे में प्रतिबंध
के फैसला के विरोध म कछु
करेबर
पड़ही। तभी दूसरा एकर बर कछु
न कछु करेबर पड़ही अउ नहीं त
नेतामन ल धर के परदरसन घलो
करबो ताकि एला
बंद करे। पहला
सही कहात हस अइसने कुछ करेबर
पड़ही काबर कि जब नेता मन कुछु
चीज के विरोध करते त थोड़ा बहुत
फायदा तो आेकर मिलथे। तभी
दोनोंं एक-दूसरे
का मुंह ताकते हुए अरे दूसर
मनके जे होही ते होही हमर काय
होही काबर हमू
मन घलो तो बिहाव
में नागिन डांस करके पार्टी
मना लेथन। डीजे बंद हो जाही
त हमन नागिन डांस कइसे करबो
यार...
Thursday, December 10, 2015
मोर कना पास हे.... तें जुगाड़ कर ले..
हाकी
लीग के मैच रायपुर में शुरू
हो चुके हैं। प्रतियोगिता
में आठ देशों की टीम में हिस्सा
ले रही है। चूंकि मैच में प्रवेश
के लिए टिकट आैर पास दोनों में
किसी एक का होना जरूरी है। ऐसे
में शाम को खाली घूमने वाले
लोगों के लिए आने वाले 22
दिनों
तक मनोरंजन का पता हाकी स्टेडियम
बन गया है। लेकिन बिना पास के
वहां जाना किसी तकलीफ से कम
नहीं है। क्योंकि बाहर से
स्टेडियम का नजारा देखकर हाकी
न जानने वाला व्यक्ति भी भीतर
घुसने की इच्छा जाहिर करेगा।
हाकी मैच के पास को लेकर दो
दोस्त आपस में कुछ बातें कर
रहे हैं। उनकी यह बात सोशल
मीडया तक पहुंच गई है। पहला
बोलता है साइंस कालेज मैदान
में हाकी मैच होवत हे जानत हस
कि नहीं।
दूसरा बोलता है हव
यार सुने तो हवं महूं हर लेकिन
गे नई हों। पहला बोलता है जाना
हे का बता। दूसरा बोलता है चल
तो देबो फेर हमर करा न तो टिकट
हे आैर न पास हे भइ,
कईसे
बनही। तभी पहला बोलता है मे
हों न तें चिंता झन कर। मोर
करा जुगाड़ हे पास के। दूसरा
तपाक से बोलता हे तोर करा कहां
ले आही। पहला उसकी बात काटते
हुए अरे ते मोला नइ जानस। मोर
करा सबो जुगाड़ हे। तें आेला
जानथस नहीं हमर मोहल्ला में
रथे साहब तेला। दूसरा बोलता
है अच्छा आे साहब ल काहत हस
का। पहला बोलता है.
हव
उही ला। दूसरा बोलता है त आेकर
करा कहां ले आ जाही पास ह..।
पहला बोलता है अरे ते नई जानस
आेकर भले हाकी से कोई लेना-देना
नई हे लेकिन अइसने मन करा तो
पास मन आथे। तें एकरा रूक मेंहर
जाके आवत हों आेकर घर ले। थोड़ी
देर बाद उसे आता हुआ देख दूसरा
बोलता है...
कइसे
मिलिस यार पास...
तभी
पहला थोड़ा झुंझलाते हुए..
हव
यार मिलिस लेकिन एकेठन पास
दिस यार आे हर। तभी दूसरा त
मेहर काय करहूं। तभी पहला
बोलता है मोर करा तो पास हे..
तोर
करा नइहे त तहूं जुगाड़ कर लेना
तहांन जाबों मेच देखेबर...।
त हमन किसानी छोड़ देन कि दारू पीना....
राज्य
में फसल खराब होने आैर कर्ज
से परेशान किसानों की खुदकुशी
के कई मामले सामने आ चुके हैं।
ऐसे में खेती किसानी से जुड़े
लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
क्योंकि हर साल किसी न किसी
समस्या काे लेकर किसान उलझे
हुए नजर आते हैं। किसानों की
इस दुर्दशा पर गांव के चौपाल
पर दो किसान आपस में खेती की
दशा को लेकर बातें कर रहे है।
किसानों की खुदकुशी के संदर्भ
में किसानों के बीच हुई बातचीत
अब सोशल मीडिया में भी पहुंच
गया है। क्या उनकी पीड़ा है आैर
वे एक दूसरे से क्या कह रहे
हैं उसका एक अंश हम अपने पाठकों
के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं।
पहला किसान बोलता है कइसे यार
ए दारी तोर फसल के का हाल हे।
दूसरा बोलता हे काय बताआें
भइया ले दे के खाय के पुरता
होयहे। फेर वहू हर कोन जनी
कतका दिन चलही। तभी पहला बोलता
है। हव यार मोरो उइ हाल हे।
पता नहीं करजा ल कइसे चुकाबो।
काबर मे सोचे रेहेंव कि थोड़
बहुत धान-पान
हो जाय रतिस ते करजा से चुका
दे रतेंव। तभी दूसरा किसान
बोलता है हव महूं आेसने सोचत
रेहेंव। पता नहीं काय होही।
तभी पहला बोलता है मे हर समाचार
मे सुनत रेहेंव कि फसल खराब
होयके चिंता आैर करजा नई पटाय
सके के कारन कई झन किसान मन
आत्महत्या कर लीन हे। तभी
दूसरा बोलता हे तभो ले तो सरकार
के कान मे जुंआ तक नहीं रेंगत
हे। पहला बोलता है सही कहात
हस। किसान मन चिंता में मरगे
अउ सरकार हर उंकर मौत ल शराब
पीये कारन मौत होना बतावत हे।
दूसरा बोलता है तहीं बता भइया
जेन किसान हर करजा में बूडे़
रही का आेहर शराब पीये बर जाही।
अरे जेकर करा खाय बर पइसा नई
हे आेला दारू पिए बर पइसा कोन
दिही। तभी पहला बोलता है। सही
काहत हस यार। कम से कम सरकार
ल तो किसान मन के चिंता करना
चाही। काबर उंकर अउ कोन पुछइया
हे। तभी दूसरा बोलता है अब
किसान मरत हे त सरकार ल आेकर
जखम मे मरहम लगाना चाही फेर
सरकार दहान ले अइसन गोठ बात
आए ले जे किसान मरे हे आेकर
परिवार वाला मन उपर काय बितत
होही एेला घलो समझना चाही।
तभी पहला बोलता है महूं मानथो
भइया किसान मन दारू पीथे फेर
अतिक नइ पिये कि दारू पीके मर
जाए। अब तो अइसे लागथे भइया
या तो हमन ला किसानी करना छोड़
देना चाही या फेर दारू पिए बर
छोड़ देना चाही काबर जब तक दूनो
काम करबो तब तक हमर मौत के अइसने
मजाक बनत रही।
Wednesday, December 9, 2015
Monday, March 25, 2013
Saade rang ko galti se aap naa kora samjho,
Isi mey samaaye indradhanushi saaton rang,Jo dikhe aapko zindagi saadagi bhari kisi ki,
To aap yun samjho satrangi hai duniya usiki,
Holi aayi satrangi rango ki bouchar laayi,Dher saari mithai aur mitha mitha pyar laayi,
Aap ki zindagi ho mithe pyar aur khusiyon se bhari,Jisme samaaye saaton rang yahi shubhkamna hai hamaari.
Isi mey samaaye indradhanushi saaton rang,Jo dikhe aapko zindagi saadagi bhari kisi ki,
To aap yun samjho satrangi hai duniya usiki,
Holi aayi satrangi rango ki bouchar laayi,Dher saari mithai aur mitha mitha pyar laayi,
Aap ki zindagi ho mithe pyar aur khusiyon se bhari,Jisme samaaye saaton rang yahi shubhkamna hai hamaari.
Sunday, September 18, 2011
Wednesday, September 14, 2011
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